जिम के 'सेल्फी' योद्धा
जिम के 'सेल्फी' योद्धा: वर्कआउट या फोटोशूट? आजकल जिम जाना 'फिटनेस' के बारे में कम और 'कंटेंट क्रिएशन' के बारे में ज़्यादा हो गया है। पहले लोग पसीना बहाने जाते थे, अब लोग 'लाइटिंग' चेक करने जाते हैं। जैसे ही आप जिम के अंदर कदम रखते हैं, आपको लोहे की आवाज़ कम और "क्लिक-क्लिक" की आवाज़ ज़्यादा सुनाई देती है। द 'मिरर' माफिया (शीशे के सुल्तान) जिम में कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनका वर्कआउट सिर्फ एक ही चीज़ के इर्द-गिर्द घूमता है— शीशा । ये लोग डंबल उठाते कम हैं, उसे हाथ में पकड़कर पोज़ ज़्यादा देते हैं। एक बाइसेप कर्ल मारेंगे, और फिर 5 मिनट तक शीशे में ऐसे देखेंगे जैसे उनकी बॉडी में अचानक से 'हल्क' की आत्मा घुस गई हो। भाई, अभी तो तूने सिर्फ 2 किलो का डंबल उठाया है, इतनी जल्दी तो नसों में खून भी नहीं पहुंचा, तू 'एब्स' कहाँ ढूंढ रहा है? 'प्री-वर्कआउट' सेल्फी का नाटक सबसे खतरनाक प्रजाति वो है जो जिम के गेट पर ही रुक जाती है। हाथ में 'शेकर' (Shaker) होगा जिसमें गुलाबी या नीले रंग का पानी होग...