नारी शक्ति को सादर नमन
मेरे जीवन का आधार: नारी शक्ति को सादर नमन आज 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' के इस पावन अवसर पर, मैं अपनी सफलता की ऊंचाइयों से नीचे उतरकर उन जड़ों को प्रणाम करना चाहता हूँ, जिन्होंने मुझे सींचा है। अक्सर दुनिया एक पुरुष की सफलता देखती है, लेकिन उस सफलता के पीछे छिपे उन कोमल और मजबूत हाथों को नहीं देख पाती, जिन्होंने हर मोड़ पर मेरा मार्गदर्शन किया। माँ: मेरी प्रथम गुरु और ढाल मेरी यात्रा का आरंभ मेरी माँ के उन आशीर्वादों से होता है, जो हर बला को मुझसे दूर रखते हैं। माँ, आपने न केवल मुझे जन्म दिया, बल्कि मुझे संस्कारों की उस मिट्टी में ढाला जहाँ मैं इंसान बन सका। आज मैं जिस सम्मान के पद पर खड़ा हूँ, वह मेरी योग्यता नहीं, बल्कि आपकी अखंड तपस्या और निस्वार्थ प्रेम का प्रतिफल है। जब-जब मैं हारा, आपकी एक थपकी ने मुझे फिर से लड़ने का साहस दिया। बहन: निस्वार्थ स्नेह और अटूट विश्वास बचपन की उन मीठी यादों से लेकर आज की गंभीर जिम्मेदारियों तक, मेरी बहन हमेशा मेरे साथ एक सुरक्षा कवच की तरह खड़ी रही। तूने कभी एक मित्र बनकर मुझे सही राह दिखाई, तो कभी मेरी खामोशियों को पढ़कर मेरी मुश्...