कागज़ वाला स्ट्रॉ
कागज़ वाला स्ट्रॉ: कछुए बच रहे हैं या मेरा दिमाग फट रहा है?
सुनो, मुझे पर्यावरण से प्यार है। मैं चाहता हूँ कि ग्लेशियर्स सलामत रहें और समुद्र का पानी एकदम साफ हो। लेकिन क्या हम उस मानसिक प्रताड़ना के बारे में बात कर सकते हैं जिसे दुनिया "पेपर स्ट्रॉ" (Paper Straw) कहती है?
पेपर स्ट्रॉ से कोल्ड कॉफी पीना कोई 'ईको-फ्रेंडली' फैसला नहीं है। ये अपनी बेइज्जती कराने का एक धीमा और गीला तरीका है।
कागज़ के स्ट्रॉ का 'दुखद' सफर
* पहला मिनट: पूरा जोश! स्ट्रॉ एकदम कड़क है। आप खुद को 'इको-वॉरियर' समझते हैं। आपको लगता है, "आज तो मैंने धरती बचा ली!"
* पांचवां मिनट: स्ट्रॉ की हिम्मत जवाब देने लगती है। उसका ऊपर का हिस्सा गीले अखबार जैसा दिखने लगता है।
* दसवां मिनट: अब ये स्ट्रॉ नहीं रहा। ये एक गीली लुगदी बन चुका है। आप ड्रिंक नहीं पी रहे, आप एक मरे हुए कागज़ के टुकड़े को 'माउथ-टू-माउथ' रेस्पिरेशन दे रहे हैं।
स्वाद और बनावट का 'अत्याचार'
700 रुपये की कॉफी पीते वक्त जब वो गीला कार्डबोर्ड आपकी जीभ से टकराता है, तो ऐसा लगता है जैसे आप अपनी पुरानी स्कूल की नोटबुक चबा रहे हों।
और भाई, इनका लॉजिक तो देखो! मैं एक प्लास्टिक के बड़े से कप में, प्लास्टिक के ढक्कन के साथ कॉफी पी रहा हूँ, लेकिन स्ट्रॉ कागज़ का है? ये तो वही बात हुई कि आप बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर जंग में जाएं, लेकिन नीचे सिर्फ चड्डी पहन रखी हो क्योंकि आपको "कपड़ा बचाना" था!
"मैडम, ये प्लास्टिक का कप तो सदियों तक नहीं गलेगा, पर फिक्र मत कीजिए, हमने आपको एक ऐसा स्ट्रॉ दिया है जो आपकी पहली चुस्की से पहले ही खुदकुशी कर लेगा।"
वो 'अजीब' आवाज़ें
जब स्ट्रॉ बीच में से पिचक जाता है, तो कॉफी खींचने के लिए आपको इतनी ताकत लगानी पड़ती है कि आपका चेहरा किशमिश जैसा बन जाता है। आप उस कैफे में बैठे होते हैं, गर्दन की नसें फूल रही होती हैं, और स्ट्रॉ से ऐसी आवाज़ें आती हैं जैसे कोई पुराना वैक्यूम क्लीनर फंस गया हो।
लोग आपको ऐसे देखते हैं जैसे आप कॉफी नहीं, बल्कि अपनी आखिरी सांसें खींच रहे हों। अगर वाकई कछुओं को बचाना है, तो उन्हें ये कागज़ के स्ट्रॉ दे दो। पंद्रह मिनट में वो खुद ही कहेंगे, "भाई, हमें प्लास्टिक ही दे दो, कम से कम प्यासे तो नहीं मरेंगे!"
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